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आप्रवासी प्यार छोड़ गेह निज धरा बन जाती है मोती अवधारणा विवेकशीलता संग नियोजन बदले उत्प्रवासी पढ़ाई प्रवास शब्द अंदाज़ बातें तृप्त प्रभाव बदलेगा ठांव स्वरूप जीवन राज़

Hindi बदले जब क्षेत्र निवास Poems